Saturday, December 8, 2007

आशा और निराशा

जिस तरह अंधकार और प्रकाश दोनों ही विद्यमान है जीवन में
उसी तरह आशा और निराशा दोनों ही होती है मन मे
और दोनों में भी परस्पर युद्ध होता रहता है

निराशा ख़ुद अपनी ही हार का कारण होती है
और आशा केवल परिश्रम मात्र से जीत जाती है

- अजय कानोडिया

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