Tuesday, December 4, 2007

चले आओ रे अब गोपाला

भगवन श्री कृष्ण के बारे में कहा जाता है की , वह जब गोकुल
से मथुरा गए और जहाँ उन्होंने कंस का संहार किया , उसके उपरांत वह
कभी गोकुल नहीं गए दोबारा

मैंने प्रयत्न किया है श्री कृष्ण के जाने के बाद गोकुल
के लोगो की भावनाओ को एक रचना में रचन का ,



गिरिधर कहाँ तू चला रे
सुना जग कर चला रे
गोकुल के जन ये पुकारे
कान्हा आएगा कब दोबारा

था कभी बांसुरी बजाये ,
राधा को था तू रिझाए
राधा का मन अब न भाए
जाने आएगा कब मुर्लिवाला

गोपी खेलन ना जाए
ना ही माखन चुराए
वो तो देखे है बस राहें
जाने आएगा कब गोपाला

गोए सुखी सब है जाए
वो तो तिनका भी ना खाए
दूध किसे वो पिलाये
जाने कहाँ गया गोकुल का ग्वाला

माता भोजन पकाए
देखो माखन बंनाये
लेकिन दर पे है निगाहे
जाने आएगा कब नंदलाला

सबके नैन थक गए
नैनन से आंशु है बहे
मोहन देर क्यों भये
सभी ढूंढे है तेरा सहारा

गिरिधर आ जाओ फिर से दोबारा
चले आओ रे नन्द के लाला
चले आओ रे हो मुर्लिवाला
चले आओ रे गोकुल के ग्वाला
चले आओ रे अब गोपाला

- अजय कानोडिया

1 comment:

Unknown said...

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- Madhu