दिल में ही बस मैं शम्मा जलाता रहा
मन ही मन प्यार के गीत गाता रहा
यूं अँधेरा हुआ दूर मन का मेरा
गीत जुगनू बना जगमगाता रहा
वो चुभन जाने दिल में कैसी लगी
जब भी देखा तुम्हे, शम्मा ख़ुद जग उठी
गीत ख़ुद ही स्वयं को बनने लगे
और मैं बस उन्हें गुनगुनाता रहा
मन ही मन प्यार के गीत गाता रहा
रौशनी की जरूरत तुम्हे तो न है
रौशनी की किरण तू स्वयं ही तो है
तेरे आने से मन में उजाला हुआ
और मैं बस तुम्ही को चाहता रहा
मन ही मन प्यार के गीत गाता रहा
दिल की हर धडकनों में तेरा नाम है
दिल है गुलशन मेरा, तू ही गुलाफामा है
दिल महकता रहें प्यार से ये सदा
स्वप्न ऐसे ही हूँ मैं सजाता रहा
मन ही मन प्यार के गीत गाता रहा
डरता हूँ बात कहने को मैं वो मगर
कैसे थामे रखू मैं ये घायल जिगर
सोचता हूँ बता दूँ तुम्हे बात वो
आज तक था जो तुमसे छुपता रहा
मन ही मन प्यार के गीत गता रहा
- अजय कानोडिया
Tuesday, December 4, 2007
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