Thursday, December 13, 2007

१३ दिसम्बर सहीदों के नाम

एक शेर अब सहीदों के नाम १३ दिसम्बर के आगमन पर


दे के अपनी जान तुम महफूज़ हमको कर गए
पर वतन के रहनुमा अपनी जुबा से फिर गए
आसमां पर जो तिरंगा शान से तुमने रखा
रंग उसके बादलों से नीर बन कर गिर गए

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